आनुवंशिक इंजीनियरिंग के बुनियादी सिद्धांतों को समझना
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आनुवंशिक इंजीनियरिंग वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें किसी जीव के DNA में सीधे बदलाव करके उसकी विशेषताओं को बदला या नया गुण जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया इस समझ पर आधारित है कि DNA में मौजूद जीन ही तय करते हैं कि किसी जीव में कौन से गुण दिखेंगे।
वैज्ञानिक अक्सर किसी एक जीव से उपयोगी जीन को अलग करके दूसरे जीव में डाल देते हैं, जिससे उसमें नया गुण विकसित हो जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल कृषि में फसलों को अधिक उपज देने या बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी बनाने के लिए किया जाता है।
चिकित्सा क्षेत्र में भी आनुवंशिक इंजीनियरिंग की भूमिका बढ़ी है, जैसे इंसुलिन जैसी दवाइयाँ अब बैक्टीरिया के जरिए बड़े पैमाने पर तैयार की जाती हैं। हालाँकि यह तकनीक जितनी संभावनाएँ खोलती है, उतने ही नैतिक और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी साथ लेकर आती है।