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समाचार की समझ

गुमनाम स्रोतों के इस्तेमाल की नैतिकता

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Photo: Nbc studio tour bookmark 1935 by National Broadcasting Company Uploaded by We hope at en.wikipedia (Public domain), via Openverse

कई बार कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहता है, पर अपनी सुरक्षा या नौकरी की चिंता के कारण नाम उजागर नहीं करना चाहता। ऐसे मामलों में पत्रकार उसकी पहचान गुप्त रखते हुए उसकी जानकारी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस तरह के स्रोतों का इस्तेमाल एक ज़िम्मेदारी भरा फ़ैसला होता है, क्योंकि पाठक उस जानकारी की सच्चाई ख़ुद जाँच नहीं सकता। इसलिए ज़्यादातर विश्वसनीय समाचार माध्यम गुमनाम स्रोत से मिली जानकारी को किसी और तरीके से भी पुष्टि करने की कोशिश करते हैं।

यह भी ज़रूरी माना जाता है कि गुमनाम स्रोत का इस्तेमाल सिर्फ़ तभी हो जब जानकारी सार्वजनिक हित में हो और उसे किसी और तरीके से हासिल करना संभव न हो। इसे बहुत सामान्य तरीके से इस्तेमाल करना पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमज़ोर कर सकता है।

यह संतुलन बनाना आसान नहीं है, क्योंकि एक तरफ़ स्रोत की सुरक्षा का सवाल होता है, तो दूसरी तरफ़ पाठक का जानकारी पर भरोसा। यही वजह है कि इसे पत्रकारिता की नैतिकता का एक संवेदनशील हिस्सा माना जाता है।

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