राजकोषीय और मौद्रिक नीति में फ़र्क़
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राजकोषीय नीति सरकार के ख़र्च और कर से जुड़े फ़ैसलों को दर्शाती है, जैसे सरकार कितना ख़र्च करेगी और किन क्षेत्रों से कितना कर वसूलेगी। यह फ़ैसले आमतौर पर सरकार और संसद द्वारा लिए जाते हैं।
मौद्रिक नीति इससे अलग है, यह ब्याज दरों और पैसे की आपूर्ति से जुड़ी होती है, जिसे केंद्रीय बैंक तय करता है। इसका मक़सद महँगाई को नियंत्रण में रखना और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना होता है।
दोनों नीतियाँ अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं, पर यह अलग अलग औज़ारों और अलग अलग संस्थाओं के ज़रिए काम करती हैं। राजकोषीय नीति सीधे ख़र्च और कर से जुड़ी है, जबकि मौद्रिक नीति पैसे की लागत यानी ब्याज दर से जुड़ी है।
दोनों नीतियों के बीच तालमेल ज़रूरी माना जाता है, क्योंकि अगर एक दिशा में जा रही हो और दूसरी विपरीत दिशा में, तो इसका असर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ सकता है।