Samachar

Har ghante ka bulletin. Published in Hindi.
210articles
0sources cited
0photographs
अर्थव्यवस्था सरल भाषा में

राजकोषीय और मौद्रिक नीति में फ़र्क़

Launch library · evergreen read

Photo: Nbc studio tour bookmark 1935 by National Broadcasting Company Uploaded by We hope at en.wikipedia (Public domain), via Openverse

राजकोषीय नीति सरकार के ख़र्च और कर से जुड़े फ़ैसलों को दर्शाती है, जैसे सरकार कितना ख़र्च करेगी और किन क्षेत्रों से कितना कर वसूलेगी। यह फ़ैसले आमतौर पर सरकार और संसद द्वारा लिए जाते हैं।

मौद्रिक नीति इससे अलग है, यह ब्याज दरों और पैसे की आपूर्ति से जुड़ी होती है, जिसे केंद्रीय बैंक तय करता है। इसका मक़सद महँगाई को नियंत्रण में रखना और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना होता है।

दोनों नीतियाँ अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं, पर यह अलग अलग औज़ारों और अलग अलग संस्थाओं के ज़रिए काम करती हैं। राजकोषीय नीति सीधे ख़र्च और कर से जुड़ी है, जबकि मौद्रिक नीति पैसे की लागत यानी ब्याज दर से जुड़ी है।

दोनों नीतियों के बीच तालमेल ज़रूरी माना जाता है, क्योंकि अगर एक दिशा में जा रही हो और दूसरी विपरीत दिशा में, तो इसका असर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ सकता है।

Back to the library

Share

Sharing opens the network in a new tab. No tracking scripts are loaded on this page.

Printed from Samachar. Sources for this article are listed at the end of the page.