विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को सरल भाषा में समझना
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विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, यानी FDI, तब होता है जब कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति किसी दूसरे देश में सीधे कारोबार में पैसा लगाता है, जैसे नई फैक्टरी बनाना, किसी स्थानीय कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना, या नया कार्यालय खोलना। इसका मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि उस कारोबार में लंबे समय की भागीदारी और कुछ हद तक नियंत्रण भी होता है।
यह “पोर्टफोलियो निवेश” से अलग है, जहाँ निवेशक सिर्फ शेयर बाज़ार में स्टॉक खरीदता है, बिना कंपनी के रोज़मर्रा के कामकाज में शामिल हुए। FDI में विदेशी निवेशक अक्सर प्रबंधन, तकनीक और अनुभव भी साथ लेकर आता है, जो सिर्फ पैसे से ज्यादा योगदान देता है।
किसी देश के लिए FDI आकर्षक माना जाता है क्योंकि इससे रोज़गार बनते हैं, नई तकनीक आती है, और स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ने का मौका मिलता है। यही वजह है कि कई सरकारें विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए नीतियों में लगातार बदलाव करती रहती हैं।