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भारत की संस्थाएँ

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों को समझना

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Photo: Audax phonographic stylus on Rek-o-Kut record player (53998133589) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

भारतीय संविधान हर नागरिक को कुछ बुनियादी अधिकार देता है, जिन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है। यह अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा के लिए बनाए गए हैं, और इन्हें अदालत में लागू करवाया जा सकता है।

इनमें समानता का अधिकार शामिल है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कानून के सामने सभी नागरिक बराबर हों। इसके अलावा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और शोषण के खिलाफ़ अधिकार जैसे प्रावधान भी इसमें शामिल हैं।

यह अधिकार सरकार की शक्तियों पर एक सीमा भी तय करते हैं, क्योंकि कोई भी कानून या सरकारी कार्रवाई इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती। अगर ऐसा होता है, तो नागरिक अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

यह अधिकार भारत के लोकतंत्र की नींव का हिस्सा हैं, क्योंकि यह सुनिश्चित करते हैं कि हर नागरिक की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा संविधान के ज़रिए हो, न कि सिर्फ़ सरकार की इच्छा पर निर्भर रहे।

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