भारत में हरित क्रांति क्या थी
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हरित क्रांति भारत में कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए हुए एक बड़े बदलाव का दौर था, जो बीसवीं सदी के मध्य के बाद शुरू हुआ। इसका मुख्य मकसद यह था कि देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सके, क्योंकि उससे पहले भोजन की भारी कमी और आयात पर निर्भरता एक बड़ी चिंता थी।
इस बदलाव में अधिक उपज देने वाली बीजों की नई किस्मों का इस्तेमाल शुरू हुआ, साथ ही उर्वरकों, कीटनाशकों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं का उपयोग भी बढ़ाया गया। खासकर गेहूं और चावल की खेती में इन बदलावों का बड़ा असर देखने को मिला, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन काफी बढ़ गया।
वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयासों से यह संभव हुआ, जिन्होंने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप नई कृषि तकनीकों को अपनाने में किसानों की मदद की। हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न की कमी वाले देश से एक बड़े खाद्य उत्पादक देश में बदलने में अहम भूमिका निभाई।