योजना आयोग की ऐतिहासिक भूमिका क्या थी
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योजना आयोग भारत में दशकों तक आर्थिक योजना बनाने वाली मुख्य संस्था रही, जिसका काम देश के संसाधनों को अलग अलग क्षेत्रों में बाँटने की योजना बनाना था। यह पंचवर्षीय योजनाओं के ज़रिए विकास की दिशा तय करता था।
इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना था कि देश के सीमित संसाधनों का इस्तेमाल सबसे ज़रूरी क्षेत्रों में हो, जैसे कृषि, उद्योग और बुनियादी ढाँचा। यह केंद्र और राज्यों के बीच योजनाओं के तालमेल का भी काम देखता था।
समय के साथ भारत की अर्थव्यवस्था अधिक खुली और बाज़ार आधारित होती गई, जिसके कारण केंद्रीकृत योजना बनाने वाली इस तरह की संस्था की भूमिका पर सवाल उठने लगे, और आगे चलकर इसकी जगह एक नई नीति संस्था ने ली।
इसकी ऐतिहासिक भूमिका को समझना यह दिखाता है कि भारत की आर्थिक सोच शुरुआती दशकों में केंद्रीकृत योजना पर आधारित थी, जो बाद में बदलती वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के साथ बदलती गई।