कैलेंडर प्रणालियों का इतिहास
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इंसानों ने समय को मापने और मौसमों को समझने के लिए हज़ारों साल पहले से कैलेंडर बनाना शुरू किया था। शुरुआती कैलेंडर अक्सर चाँद की गति पर आधारित होते थे, क्योंकि चाँद के बदलते आकार को आसानी से देखा जा सकता था।
कई सभ्यताओं ने अपने अपने तरीके से समय मापने की प्रणाली विकसित की, कुछ ने सूरज की गति को आधार बनाया, तो कुछ ने चाँद और सूरज दोनों को मिलाकर एक प्रणाली बनाई। यह अंतर अलग अलग संस्कृतियों की खगोलीय समझ को दर्शाता है।
समय के साथ व्यापार और यात्रा बढ़ने से एक साझा और मानकीकृत कैलेंडर की ज़रूरत महसूस होने लगी, ताकि अलग अलग जगहों के लोग तारीख़ों को लेकर एक समान समझ रख सकें।
आज दुनिया भर में एक साझा कैलेंडर व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है, हालाँकि कई देश और संस्कृतियाँ आज भी अपने पारंपरिक कैलेंडर को धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों के लिए इस्तेमाल करती हैं।