डाक प्रणाली के इतिहास को समझना
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संदेश पहुँचाने की संगठित व्यवस्था प्राचीन सभ्यताओं में भी मौजूद थी, जहाँ राजा और शासक अपने संदेशवाहकों के जरिए दूर दराज तक आदेश और सूचनाएँ भेजते थे। शुरुआती डाक व्यवस्थाएँ मुख्य रूप से सरकारी और सैन्य जरूरतों के लिए बनाई गई थीं, आम जनता के लिए नहीं।
समय के साथ यह व्यवस्था धीरे धीरे आम लोगों के लिए भी खुलती गई, और सड़कों तथा घोड़ों पर आधारित संदेशवाहक तंत्र से आगे बढ़कर संगठित डाकघर और तय मार्गों वाली प्रणाली विकसित हुई। इससे व्यापार और निजी पत्राचार दोनों को नई गति मिली।
उन्नीसवीं सदी में एक समान डाक टिकट और तय दरों की शुरुआत ने डाक सेवा को और सुलभ बना दिया, जिससे किसी भी आम नागरिक के लिए पत्र भेजना आसान और सस्ता हो गया। यही बुनियादी ढाँचा आज की आधुनिक डाक और कूरियर सेवाओं की नींव बना।