समय मापने की परंपरा का इतिहास
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इंसानों ने समय को समझने और मापने के लिए शुरुआत में सूरज की स्थिति और छाया का इस्तेमाल किया, जैसे धूपघड़ी के ज़रिए दिन के अलग अलग समय का अंदाज़ा लगाना। यह सबसे पुराने समय मापने के तरीकों में गिना जाता है।
समय के साथ पानी और रेत जैसी चीज़ों के बहाव के आधार पर भी घड़ियाँ बनाई गईं, जो दिन के उजाले पर निर्भर नहीं होती थीं। यह तरीके रात के समय या बादल भरे मौसम में भी समय का अंदाज़ा देने में मदद करते थे।
आगे चलकर यांत्रिक घड़ियों का आविष्कार हुआ, जिसने समय मापने को अधिक सटीक और भरोसेमंद बना दिया। यह तकनीक बाद में इतनी छोटी होती गई कि इसे जेब और कलाई पर भी पहना जा सकता था।
आज के डिजिटल दौर में समय मापना बेहद सटीक हो चुका है, पर इसकी जड़ें उन्हीं शुरुआती तरीकों में हैं, जिनसे इंसानों ने पहली बार दिन और रात के गुज़रते पलों को समझने की कोशिश की थी।