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अर्थव्यवस्था सरल भाषा में

कर्ज़ और क्रेडिट कैसे काम करते हैं

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Photo: Broadcast Studio (53998133689) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

कर्ज़ एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था किसी और से पैसा उधार लेती है, इस वादे के साथ कि वह इसे तय समय में ब्याज सहित वापस चुकाएगी। यह व्यवस्था लोगों को बड़े ख़र्च तुरंत करने में मदद करती है, बिना पूरी रक़म पहले से जमा किए।

क्रेडिट का मतलब है किसी व्यक्ति या संस्था की उधार चुकाने की क्षमता और भरोसेमंदी। बैंक और वित्तीय संस्थाएँ इस भरोसे के आधार पर तय करती हैं कि किसी को कितना कर्ज़ देना सुरक्षित है और किस ब्याज दर पर।

जब कर्ज़ समय पर चुकाया जाता है, तो व्यक्ति की क्रेडिट साख मज़बूत होती है, जिससे भविष्य में कर्ज़ लेना आसान और सस्ता हो जाता है। इसके उलट, समय पर भुगतान न करने से यह साख कमज़ोर हो सकती है।

यह पूरी व्यवस्था भरोसे पर टिकी होती है, और इसी वजह से ज़िम्मेदारी से कर्ज़ लेना और उसे समय पर चुकाना, दोनों व्यक्तिगत और व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए स्वस्थ माने जाते हैं।

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