व्यंग्य और पैरोडी लेखों को कैसे पहचानें
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व्यंग्य लेखन असल खबर जैसा दिखने के बावजूद असल में समाज या सत्ता पर हल्के फुल्के अंदाज़ में चोट करने के लिए लिखा जाता है। इसका मकसद पाठक को हँसाना और सोचने पर मजबूर करना होता है, तथ्य बताना नहीं। ऐसे लेख अक्सर बेहद बढ़ा चढ़ाकर बातें कहते हैं, जो असल दुनिया में लगभग असंभव लगती हैं।
पहचान का एक आसान तरीका है प्रकाशन का नाम और उसका सामान्य रुझान जाँचना। कई वेबसाइटें खुद को व्यंग्य मंच के रूप में पेश करती हैं और अपने बारे में पन्ने पर यह साफ लिख देती हैं। इसके अलावा भाषा में अतिशयोक्ति, अजीब उपमाएँ और हास्यास्पद उद्धरण भी संकेत देते हैं कि लेख गंभीर रिपोर्ट नहीं है।
फिर भी सोशल मीडिया पर व्यंग्य अक्सर संदर्भ के बिना साझा हो जाता है, जिससे लोग उसे सच मान बैठते हैं। इसलिए किसी चौंकाने वाली खबर को आगे भेजने से पहले मूल स्रोत खोलकर देखना और अन्य विश्वसनीय जगहों पर उसकी पुष्टि करना एक अच्छी आदत मानी जाती है।