Samachar

Har ghante ka bulletin. Published in Hindi.
210articles
0sources cited
0photographs
इतिहास के पन्ने

ओलंपिक मशाल रिले की शुरुआत और उसका प्रतीकात्मक अर्थ

Launch library · evergreen read

Photo: Broadcast studio camera (53997810821) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

ओलंपिक मशाल रिले वह परंपरा है जिसमें खेलों की शुरुआत से पहले एक जलती हुई मशाल कई धावकों के हाथों से गुजरते हुए मेजबान शहर तक पहुंचाई जाती है। यह मशाल यूनान में जलाई जाती है, उसी परंपरा की याद में जो प्राचीन ओलंपिक खेलों से जुड़ी मानी जाती है।

यह रिले आधुनिक युग में बीसवीं सदी में शुरू हुई परंपरा है, और इसका मकसद ओलंपिक खेलों को प्राचीन यूनानी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ना था। मशाल का सफर अक्सर कई देशों और शहरों से होकर गुजरता है, जिससे यह आयोजन शुरू होने से पहले ही दुनिया भर का ध्यान खींचने लगता है।

मशाल की लौ को शांति, एकता और मानवीय भावना की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। जब यह अंततः मुख्य स्टेडियम में पहुंचकर विशाल कड़ाही को प्रज्वलित करती है, तो यह पल खेलों के औपचारिक उद्घाटन का सबसे भावुक और यादगार क्षण बन जाता है।

Back to the library

Share

Sharing opens the network in a new tab. No tracking scripts are loaded on this page.

Printed from Samachar. Sources for this article are listed at the end of the page.