प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत में फ़र्क़
Launch library · evergreen read

प्राथमिक स्रोत वह होता है जो किसी घटना से सीधे जुड़ा हो, जैसे कोई मूल दस्तावेज़, आँखों देखा गवाह या किसी अधिकारी का सीधा बयान। यह जानकारी का सबसे प्रत्यक्ष रूप माना जाता है, क्योंकि इसमें बीच में किसी और की व्याख्या शामिल नहीं होती।
द्वितीयक स्रोत वह होता है जो प्राथमिक जानकारी की व्याख्या, विश्लेषण या सारांश पेश करता है। ज़्यादातर समाचार रिपोर्ट, किताबें और लेख इसी श्रेणी में आते हैं, क्योंकि यह अक्सर किसी और द्वारा इकट्ठा की गई जानकारी पर आधारित होते हैं।
दोनों तरह के स्रोत अपनी जगह उपयोगी हैं। प्राथमिक स्रोत सटीकता और प्रत्यक्षता देते हैं, जबकि द्वितीयक स्रोत जटिल जानकारी को समझने लायक और संदर्भ सहित पेश करने में मदद करते हैं।
किसी विषय को गहराई से समझने के लिए दोनों तरह के स्रोतों का इस्तेमाल करना उपयोगी होता है, क्योंकि इससे न सिर्फ़ मूल तथ्य मिलते हैं, बल्कि उनके पीछे की पृष्ठभूमि और व्याख्या भी समझ आती है।