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अर्थव्यवस्था सरल भाषा में

सार्वजनिक वस्तु और निजी वस्तु में फ़र्क़

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Photo: Moses Znaimer (52108225299) by John Bauld from Toronto, Canada (CC BY 2.0), via Openverse

अर्थशास्त्र में सार्वजनिक वस्तु वह होती है जिसका इस्तेमाल एक साथ कई लोग कर सकते हैं, और किसी एक व्यक्ति के इस्तेमाल से दूसरे के इस्तेमाल में कमी नहीं आती, जैसे सड़कें, स्वच्छ हवा या सार्वजनिक सुरक्षा।

निजी वस्तु इसके उलट होती है, इसका इस्तेमाल सीमित होता है और अगर एक व्यक्ति इसका उपभोग करता है, तो दूसरे के लिए वह उपलब्ध नहीं रहती, जैसे भोजन या कपड़े, जिन्हें बाज़ार में ख़रीदा और बेचा जाता है।

सार्वजनिक वस्तुओं को आमतौर पर सरकार उपलब्ध कराती है, क्योंकि निजी कंपनियों के लिए इनसे सीधा मुनाफ़ा कमाना मुश्किल होता है, जबकि यह समाज के लिए बेहद ज़रूरी होती हैं।

यह फ़र्क़ समझना यह स्पष्ट करने में मदद करता है कि क्यों कुछ सेवाएँ बाज़ार पर छोड़ दी जाती हैं जबकि कुछ को सरकार अपनी ज़िम्मेदारी मानकर उपलब्ध कराती है, ताकि समाज के हर वर्ग तक इनकी पहुँच बनी रहे।

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