चक्रवृद्धि ब्याज को सरल भाषा में समझना
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चक्रवृद्धि ब्याज उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें ब्याज केवल मूल राशि पर नहीं, बल्कि पहले जुड़ चुके ब्याज पर भी लगता जाता है। इसका मतलब है कि समय के साथ पैसा उस रफ्तार से नहीं बल्कि उससे कहीं तेज रफ्तार से बढ़ता है, क्योंकि हर बार का ब्याज अगली गणना का हिस्सा बन जाता है।
इसके उलट साधारण ब्याज में हर बार ब्याज केवल शुरुआती मूल राशि पर ही लगता है, इसलिए वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी और स्थिर रहती है। यही अंतर लंबी अवधि में बड़ा फर्क पैदा कर देता है, खासकर जब पैसा वर्षों तक निवेशित रहे।
यही कारण है कि लंबी अवधि की बचत योजनाओं में समय की भूमिका इतनी अहम मानी जाती है। जितनी जल्दी बचत शुरू की जाए, उतना ही ज्यादा समय चक्रवृद्धि ब्याज को अपना असर दिखाने के लिए मिलता है, जिससे अंतिम राशि पर बड़ा फर्क पड़ सकता है।