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अर्थव्यवस्था सरल भाषा में

मज़दूरी और उत्पादकता के रिश्ते को समझना

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Photo: Broadcast studio camera (53997810821) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

उत्पादकता का मतलब है कि एक तय समय में कोई कर्मचारी या मशीन कितना उत्पादन कर पाती है। जब उत्पादकता बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि उतने ही समय और संसाधन में ज़्यादा काम हो पा रहा है।

आमतौर पर यह माना जाता है कि जब उत्पादकता बढ़ती है, तो मज़दूरी भी उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए, क्योंकि कर्मचारी कंपनी के लिए ज़्यादा मूल्य पैदा कर रहे होते हैं। यह रिश्ता आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालाँकि व्यवहार में यह रिश्ता हमेशा सीधा नहीं होता, क्योंकि मज़दूरी पर बाज़ार की मांग, प्रतिस्पर्धा और नीतियों का भी असर पड़ता है। कई बार उत्पादकता बढ़ने के बावजूद मज़दूरी उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ती।

यह विषय अर्थशास्त्रियों के बीच लगातार चर्चा का हिस्सा रहता है, क्योंकि उत्पादकता और मज़दूरी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक सेहत के लिए ज़रूरी माना जाता है।

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