मंदी (रिसेशन) क्या है, सरल भाषा में
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मंदी, यानी रिसेशन, आर्थिक गतिविधि में सुस्ती के उस दौर को कहा जाता है जब उत्पादन, खर्च और रोजगार जैसे संकेतक लगातार गिरने लगते हैं। आमतौर पर जब किसी देश की अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाहियों तक सिकुड़ती है, यानी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) घटता है, तो उसे तकनीकी रूप से मंदी माना जाता है।
मंदी के दौरान कंपनियां अक्सर उत्पादन घटाती हैं, नई भर्तियां रोक देती हैं, और कई बार कर्मचारियों की छंटनी भी करती हैं। इसका असर आम लोगों की आमदनी, खर्च करने की क्षमता और भविष्य को लेकर उनके भरोसे पर भी पड़ता है, जिससे मांग और घट सकती है।
मंदी को अर्थव्यवस्था के स्वाभाविक उतार चढ़ाव, यानी व्यापार चक्र का हिस्सा माना जाता है: विकास के दौर के बाद कभी कभी सुस्ती आती है, और फिर धीरे धीरे रिकवरी शुरू होती है। सरकारें और केंद्रीय बैंक अक्सर नीतिगत कदमों से इस चक्र को संभालने की कोशिश करते हैं।