केंद्रीय बैंकों की महँगाई लक्ष्यीकरण नीति क्या है
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महँगाई लक्ष्यीकरण एक ऐसी नीति है जिसमें केंद्रीय बैंक पहले से एक तय सीमा घोषित करता है, जिसके भीतर वह देश की महँगाई दर को बनाए रखने की कोशिश करता है। इसका मकसद कीमतों में बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव को रोककर आर्थिक स्थिरता बनाए रखना होता है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से ब्याज दरों का इस्तेमाल करता है। अगर महँगाई तय सीमा से ज्यादा बढ़ने लगे, तो ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, ताकि उधार लेना महँगा हो जाए और लोग खर्च करने की बजाय बचत की ओर झुकें।
इसके उलट अगर महँगाई बहुत कम हो जाए या अर्थव्यवस्था धीमी पड़ जाए, तो ब्याज दरें घटाई जाती हैं ताकि खर्च और निवेश को बढ़ावा मिले। इस तरह की नीति निवेशकों और आम लोगों दोनों को यह भरोसा देती है कि भविष्य की कीमतें पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं होंगी।