Samachar

Har ghante ka bulletin. Published in Hindi.
210articles
0sources cited
0photographs
अर्थव्यवस्था सरल भाषा में

केंद्रीय बैंक ब्याज दरें क्यों घटाते बढ़ाते हैं

Launch library · evergreen read

Photo: Americana Hotel, circa 1960s - Gary, Indiana (4218092677) by Steve Shook from Moscow, Idaho, USA (CC BY 2.0), via Openverse

ब्याज दर वह कीमत है जो पैसा उधार लेने पर चुकानी पड़ती है, और केंद्रीय बैंक इसे अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के मुख्य औजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जब दरें बढ़ाई जाती हैं, तो उधार लेना महंगा हो जाता है, जिससे लोग और कंपनियां खर्च करने में थोड़ी सावधानी बरतते हैं।

इसका इस्तेमाल आमतौर पर तब होता है जब महंगाई तय दायरे से ऊपर बढ़ने लगती है, क्योंकि खर्च धीमा होने से मांग कम होती है और कीमतों पर दबाव घटता है। इसके उलट, जब अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती है, तो दरें घटाकर उधार को सस्ता और आकर्षक बनाया जाता है।

यह फैसला हमेशा एक नाजुक संतुलन होता है, क्योंकि बहुत ऊंची दरें विकास को रोक सकती हैं, जबकि बहुत नीची दरें महंगाई को बेकाबू कर सकती हैं। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन करके ही दरों में बदलाव करने का फैसला लेते हैं।

Back to the library

Share

Sharing opens the network in a new tab. No tracking scripts are loaded on this page.

Printed from Samachar. Sources for this article are listed at the end of the page.