केंद्रीय बैंक ब्याज दरें क्यों घटाते बढ़ाते हैं
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ब्याज दर वह कीमत है जो पैसा उधार लेने पर चुकानी पड़ती है, और केंद्रीय बैंक इसे अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के मुख्य औजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जब दरें बढ़ाई जाती हैं, तो उधार लेना महंगा हो जाता है, जिससे लोग और कंपनियां खर्च करने में थोड़ी सावधानी बरतते हैं।
इसका इस्तेमाल आमतौर पर तब होता है जब महंगाई तय दायरे से ऊपर बढ़ने लगती है, क्योंकि खर्च धीमा होने से मांग कम होती है और कीमतों पर दबाव घटता है। इसके उलट, जब अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती है, तो दरें घटाकर उधार को सस्ता और आकर्षक बनाया जाता है।
यह फैसला हमेशा एक नाजुक संतुलन होता है, क्योंकि बहुत ऊंची दरें विकास को रोक सकती हैं, जबकि बहुत नीची दरें महंगाई को बेकाबू कर सकती हैं। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन करके ही दरों में बदलाव करने का फैसला लेते हैं।