Samachar

Har ghante ka bulletin. Published in Hindi.
210articles
0sources cited
0photographs
समाचार की समझ

सुर्खियाँ अक्सर खबर लिखने के बाद क्यों बनती हैं

Launch library · evergreen read

Photo: Moses Znaimer (52108225299) by John Bauld from Toronto, Canada (CC BY 2.0), via Openverse

ज्यादातर पाठकों को लगता है कि रिपोर्टर पहले सुर्खी सोचता है और फिर उसके इर्द गिर्द खबर लिखता है, लेकिन असल प्रक्रिया अक्सर उल्टी होती है। पूरी खबर लिखे जाने के बाद संपादक या सब एडिटर उसका सार निकालकर एक संक्षिप्त, सटीक सुर्खी बनाता है, क्योंकि तभी यह स्पष्ट होता है कि खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा क्या है।

सुर्खी लिखना एक अलग कौशल माना जाता है: उसे सीमित जगह में, कुछ ही शब्दों में, खबर का सार भी देना होता है और ध्यान भी खींचना होता है। अगर सुर्खी पहले से तय होती और खबर बाद में बदल जाती, तो शीर्षक और सामग्री में तालमेल बिगड़ने का खतरा रहता, जो पाठक को भ्रमित कर सकता है।

कई बड़े प्रकाशनों में हेडलाइन लिखने का काम रिपोर्टर के बजाय डेस्क पर बैठे संपादक करते हैं, ताकि निष्पक्ष नज़र से देखा जा सके कि खबर में असल में सबसे ज़रूरी बात क्या है। यही प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सुर्खी खबर को सही ढंग से दर्शाए, न कि सिर्फ ध्यान आकर्षित करे।

Back to the library

Share

Sharing opens the network in a new tab. No tracking scripts are loaded on this page.

Printed from Samachar. Sources for this article are listed at the end of the page.